"तुमसे मोहब्बत होती तो , छोड़ भी देता...
इबादत की है , मरते दम तक सजदे करूँगा..."
मैने देखी है तेरे चेहरे की वो खामोशी भी...
जिसे हँसते लबों के नीचे तू ने छुपाया अक्सर...
मैने देखी तेरे चेहरे की वो मायूसी भी...
मुस्कुरा कर जब दिल को मेरे बहलाया अक्सर...
वो तेरा सबसे बड़ा हुनर है ये जान ले तू...
जिसे सबसे बड़ी कमज़ोरी तू ने बताया अक्सर...
तुझ से मोहब्बत है ये बात अपनी जगह है...
उस से पहले तेरे सपनों का ख़्याल मुझे आया अक्सर...
वादा है मेरा वो ख़्वाब मुक्कमल होंगे...
मेरे बाद जिन्होंने तुझे रातों को जगाया अक्सर...
तू मेरी हिम्मत है तुझे टूटने दूं कैसे...
कैसे मुरझाने दूँ वो फूल जिसने मेरे चमन को महकाया अक्सर...
तेरी आँखों की नमी मेरी रूह तक को है बेचैन करती...
तेरे खुशी के आँसुओं ने भी मुझे डराया अक्सर...
बड़ा बेचैन सा हो जाता हूँ जब तुझे पाने के लिये उन रातों को...
तेरी यादों नें थपकियाँ देकर तब मुझे सुलाया अक्सर...
गुनगुनाया करना...
मेरी खामोशियों में तुम हरदम गुनगुनाती रहना...
मैं सुरून के नींद की ज़मीं तुमको दूँगा...
तुम उस ज़मीं पर सपनों का महल बनाती रहना...
मैं ले आया करूँगा प्रेमवन से कुछ सुंदर से शब्द...
तुम उन शब्दों को तरीके से सजाती रहना...
तुमको कभी रूठने ही नही दूँगा वादा है मेरा...
बस मैं रूठ जाया करूँ तो तुम मनाती रहना...
मैं पत्थर हूँ मगर दिल पत्थर का नही...
मैं डर जाया करूँ जब जब तब तब मुझे बच्चों की तर बहलाती रहना...
मेरा हर दर्द तुम से है मेरी दवा भी चुम ही हो...
टूटने लगूँ जब मैं तब तुम सर मेरा सहलाया करना...
ना समझ हूँ मोहब्बत में शायद तुम्हे समझ ना पाऊँ...
रूठना मत बस हर बार प्यार से समझाया करना...
जब कभी छोड़ दूँ हाथ चलते चलते...
तुम जानबूझ कर बाहों में फिसल जाया करना...
मेरी खामोशियों में तुम हमेशा गुनगुनाया करना..